मुझसे किसी ने पूछा तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो, तुम्हें क्या मिलता है.. मैंने हंस कर कहा: देना लेना तो व्यापार है.. जो देकर कुछ न मांगे वो ही तो प्यार हैं.
अब तक प्रवासी हूं। दरअसल ये सिलसिला बहुत पहले एक छोटे से गांव से होकर देवघर होता हुआ दिल्ली पर आकर कुछ देर के लिए ठहरा है। अनगिनत उतार चढ़ाव को देखता संप्रति पत्रकारिता के पेशे में कागद कारे कर रहा हूं ...
2 टिप्पणियाँ:
बढ़िया तस्वीरें!!
मुझसे किसी ने पूछा
तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
तुम्हें क्या मिलता है..
मैंने हंस कर कहा:
देना लेना तो व्यापार है..
जो देकर कुछ न मांगे
वो ही तो प्यार हैं.
नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.
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